भारत में चुनाव त्यौहार की तरह आते रहते हैं। यहां पर वोट डालने को भी राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाया जाता है। चुनाव में प्रत्याशियों की जीत में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है प्रचार और उसके तरीके। आमतौर पर देखा गया है कि प्रत्याशी प्रचार तो करते हैं लेकिन, अपनी जनता के बीच वो जगह नहीं बना पाते जिसके वो वाकई में हकदार होते हैं। जिसकी वजह से प्रत्याशी अपने मुकाम तक नहीं पहुंच पाता है। संचार भारत और Oneteo की Election Seva एक ऐसी जगह है जहां पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की हर तरह से मदद की जाती है।

Election Seva के अनुभवी सदस्य प्रत्याशियों के असरदार प्रचार के लिए काम करने में माहिर हैं, टीम के सभी सदस्यों का मानना है कि प्रचार के दौरान लगने वाले नारे और पम्पप्लेट लोगों के दिलों और दिमाग पर अलग ही असर डालते हैं। 2017 में यूपी विधानसभा में बीजेपी के नारे ‘सबका साथ सबका विकास’ ने लोगों को नई दिशा दिखाई थी, वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में लगे नारे मोदी है तो मुमकिन है के नारे ने बीजेपी को 300 पार सीटें दिलाने में मदद की थी।

हम चुनाव और प्रत्याशियों के इलाके में लोगों के बीच जाकर चुनावी नारे को बनाने में विश्वास रखते हैं क्योंकि हर इलाके में लोगों की अलग-अलग समस्याएं होती हैं उनके अलग-अलग मुद्दे होते हैं और जनता की नब्ज को पकड़कर चलने में ही प्रत्याशी की जीत का रास्ता खुलता है।

बिना सटीक नारों के मैदान में उतरना का मतलब होता है बिना बंदूक के जंग लड़ना, नारे आपके चुनाव के अभियान को दम तो देते ही हैं साथ ही कार्यकर्ताओं में भी जोश भरने का काम करते हैं. हर पार्टी और हर प्रत्याशी ये जरूर चाहता है कि वो अपने नारों के जरिए अपने मतदाताओं को लुभा सके। भारतीय चुनाव के इतिहास भी इस बात का गवाह कि बिना किसी संसाधन के मात्र तेजस्वी नारों के दम बड़े-बड़े नेताओं और प्रधानमंत्री रह चुके प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा है। 1977 में स्वर्गीय इंदिरा गांधी को भारतीय राजनीति में जाइंट किलर के नाम से मशहूर राज नारायण ने उनके गढ़ में जाकर करारी शिकस्त दी थी। उस चुनाव में लगे नारों ने इंदिरा गांधी की नींव हिला डाली थी।

भारत की आयरन लेडी के नाम से मशहूर इंदिरा गांधी ने साल 1971 में “गरीबी हटाओ” का नारा दिया था जिसके बाद कांग्रेस ने सत्ता में धमाके के साथ 352 सीटों पर जीत हासिल की थी इसके बाद इसी नारे का इस्तेमाल स्वर्गीय राजीव गांधी ने भी अपने प्रचार में किया था। राजनीति के जानकारों की माने तो “गरीबी हटाओ” नारे के दम पर ही कांग्रेस ने देश में प्रचंड बहुमत हासिल किया था।